माँ-बाप तुम्हारी ही तरह आम हैं, उनसे विशिष्टता की उम्मीद अन्याय है || आचार्य प्रशांत (2013)
आचार्य प्रशांत
दुर्बलता को पात्रता कहना ही भिक्षावृत्ति है || आचार्य प्रशांत (2014)
मैं आपसे ही खुल कर बात क्यों कर पाता हूँ ? || आचार्य प्रशांत (2014)
गुरु तुम्हें वो याद दिलाता है जो तुम जानते ही हो || आचार्य प्रशांत (2013)
असत्य कुछ नहीं, सब आंशिक सत्य है || आचार्य प्रशांत (2013)
ख्याल को तथ्य मत समझ लेना || आचार्य प्रशांत (2013)
कुर्बानी है छोड़ने पाने का व्यापार,छोड़ा कम पाया ज़्यादा और पाया अहंकार || आचार्य प्रशांत (2015)