
कामवासना” एक ऐसा विषय उठाती है जिसके बारे में लोग या तो खुलकर बात नहीं करते या फिर उसे गलत तरीके से समझते हैं। इस किताब ने मुझे यह समझने में मदद की कि कामना केवल शरीर से जुड़ी चीज़ नहीं है, बल्कि यह हमारे मन, डर और अज्ञान से गहराई से जुड़ी हुई है। किताब पढ़ते हुए यह साफ हुआ कि हम अक्सर अपने ही शरीर और इच्छाओं को गलत नजरिए से देखते हैं—कभी उन्हें दबाते हैं, तो कभी उनमें खो जाते हैं। आचार्य प्रशांत ...

हम वो धुरंधर हैं, जो खाना से, मन को भरने का जुगाड़ निकाले बैठें हैं। बस फिर क्या ? हम काम से भी, मन को भरनें का जुगाड़ निकाल लेते हैं। ♾️मन बीना पेंदी का लोटा है, कभी न भरने वाला। 🔹जब तक, मैं आचार्य जी के, ज्ञान के छाया में रहता हूँ। तब तक काम कोई समस्या भी होती है? इसका पता भी नहीं चलता है। 🔸लेकिन जैसे ही, आचार्य जी से दूर जाता हूँ। कामवासना, सबसे बड़ी समस्या बन जाती है, मेरे लिए। ◾ समा...

हर युवा ( लड़का-लड़की) को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए , इस विषय (कामवासना)को गहराई से समझने में यह किताब आपकी बहुत मदद करेगी। क्योंकि इस विषय पर खासकर हमारा भारतीय समाज चर्चा करने से बचता है और जब उसे इस विषय में ज्ञान नहीं होता तो फिर वह गलत जगह बंध जाता है गलत जगह संबंध बना लेता है। यह किताब आपको साफ और स्पष्ट रूप से समझाती है कैसे हमारे शरीर में कामवासना उठती है ? और ज्ञान के अभाव में हम उसे बहुत महत...

Sex जैसे विषय पर खुल कर बात करती है ये पुस्तक। इस पुस्तक में किसी तरह का moral judgment pass on नहीं किया गया है जो कि अक्सर हमारे समाज में लोग करते हैं जैसे कि लड़की से दूर रहो sex बुरा है वगैरह वगैरह। बल्कि इसमें कामवासना को अच्छे से समझाया गया है। ये बताया गया है कि वो आती कहां से है उसका क्या रोल है हमारे जीवन में और किस तरह से हमारे जीवन के बहुत सारे गलत निर्णय इस विषय को ना समझने के कारण...