
हम वो धुरंधर हैं, जो खाना से, मन को भरने का जुगाड़ निकाले बैठें हैं। बस फिर क्या ? हम काम से भी, मन को भरनें का जुगाड़ निकाल लेते हैं। ♾️मन बीना पेंदी का लोटा है, कभी न भरने वाला। 🔹जब तक, मैं आचार्य जी के, ज्ञान के छाया में रहता हूँ। तब तक काम कोई समस्या भी होती है? इसका पता भी नहीं चलता है। 🔸लेकिन जैसे ही, आचार्य जी से दूर जाता हूँ। कामवासना, सबसे बड़ी समस्या बन जाती है, मेरे लिए। ◾ समा...

सुंदर अवलोकन