कामवासना (Kaamvasna)

कामवासना (Kaamvasna)

शर्म, डर, अज्ञान
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48 Ratings & 11 Reviews
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Paperback Details
Hindi Language
148 Print Length
Description
आज अगर आदमी प्रकृति के प्रति इतना हिंसक है, पेड़-पौधों के प्रति इतना हिंसक है, जानवरों के प्रति इतना हिंसक है, तो उसकी वजह ये है कि वो अपने शरीर के प्रति भी बहुत हिंसक है।

शरीर से मुक्ति चाहते हो, तो शरीर को ‘शरीर’ रहने दो। जिन्हें शरीर से मुक्ति चाहिए हो, वो शरीर के दमन का प्रयास बिलकुल न करें। जिन्हें शरीर से ऊपर उठना हो, वो शरीर से दोस्ती करें, शरीर से डरें नहीं, घबरायें नहीं।

आचार्य प्रशांत ने इस पुस्तक के माध्यम से शरीर के प्रति शर्म, डर, अज्ञान को हमारे समक्ष रखा है।
Index
CH1
शारीरिक आकर्षण इतना प्रबल क्यों?
CH2
स्त्री शरीर का आकर्षण हावी क्यों?
CH3
नारी के लिए आकर्षण हो तो
CH4
. स्त्री-पुरुष के मध्य आकर्षण का कारण
CH5
लड़का-लड़की के खेल में जवानी की बर्बादी
CH6
क्या सेक्स का कोई विकल्प है जो मन शांत रख सके?
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