
भारत पढ़ते समय मुझे यह महसूस हुआ कि यह किताब सिर्फ देश के बारे में नहीं है, बल्कि यह हमें खुद को और अपनी सोच को समझने का मौका देती है। इसमें भारत को केवल एक भूगोल या इतिहास के रूप में नहीं, बल्कि एक गहरी चेतना और विचार के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आचार्य प्रशांत ने बहुत स्पष्ट तरीके से बताया है कि भारत की महानता केवल अतीत में नहीं, बल्कि आज के लोगों के विचार और जीवन में झलकनी चाहिए। पढ़ते समय ...

आज 🇮🇳 26 नवंबर — संविधान दिवस है। संविधान दिवस 26 नवंबर को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1949 में भारत का संविधान अपनाया गया था। इस दिन हम अपने मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक मूल्यों को याद करते हैं तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर के योगदान का सम्मान करते हैं। ⸻ ✨ आचार्य जी का भारतीय संविधान के बारे में विचार — संविधान: धर्म का फूल ...

इस पुस्तक से मेरी मुलाकात बेहद खास रही। जब मैंने आचार्य जी को यूट्यूब पर सुनना शुरू किया था, तब पहली बार जो पुस्तक मंगाई थी, वही थी — "भारत"। इस पुस्तक को घर लाने के लिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा था। आज भी वह दिन याद है, जब यह पुस्तक मेरे हाथों में आई थी। इसका शीर्षक मुझे बहुत आकर्षित कर रहा था। पुस्तक के इंतजार में मैंने एक महीने तक अपने छोटे-छोटे खर्चों में कटौती कर बचत की थी। इस पुस्तक की की...

आचार्य जी द्वारा लिखित मेरे द्वारा पढ़ी जाने वाली ये दूसरी पुस्तक थी। भारत क्या है,किन सच्चे और ऊंचे अर्थों पर इसकी नींव है और अगर भारत को महान बनाना है तो इसके लोगों को महान बनना होगा । बहुत ही सारगर्भित तरीके से भारत और भारत की दार्शनिक पृष्ठभूमि की बात की गई है। भारत से संबंधित हमारे जो भी प्रश्न मन में है,उन सबको ये पुस्तक संबोधित करती है।