भारत (Bharat)

भारत (Bharat)

अध्यात्म, दर्शन, राष्ट्र
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Paperback Details
Hindi Language
292 Print Length
Description
भारत को महान अगर कहने में रुचि रखते हो तो ख़ुद महान बनो, तुमसे ही है भारत की महानता। भारतीय अगर महान नहीं तो भारत महान कैसे हो सकता है?

बहुत महान लोग हुए हैं इस धरती पर। धर्म का पालना रहा है भारत, और विज्ञान का, और गणित का, और संगीत का भी पालना रहा है भारत ― इसलिए भारत महान था। उन लोगों की बदौलत भारत महान था।

आज भी वैसे लोग चाहिए। वैसे लोग होंगे तो भारत महान होगा, नहीं तो नहीं होगा। फिर ये तो कह लोगे कि इतिहास में पहले भारत महान था लेकिन ये नहीं कह पाओगे कि भारत आज भी महान है।

आज भारत को महान बनाना है तो अपने भीतर लोहा पैदा करो और सच की तरफ़ निष्ठा पैदा करो।
Index
CH1
भारत क्या है? भारतीय कौन?
CH2
राष्ट्रवाद: वेदांत के प्रकाश में
CH3
राष्ट्रवाद: वेदांत के ज्ञान से सेना के सम्मान तक
CH4
क्या राष्ट्रवाद हिंसक है, और सेना हिंसा का माध्यम?
CH5
कुछ लोग राष्ट्रवाद को बुरा क्यों मानते हैं?
CH6
1947 के बाद की एक बड़ी भूल
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