
अंधविश्वास पढ़कर मुझे यह समझ आया कि हम कितनी आसानी से बिना सोचे-समझे कई मान्यताओं को सच मान लेते हैं। यह किताब बहुत सीधे और तार्किक तरीके से उन विश्वासों पर सवाल उठाती है, जिन्हें हम अक्सर बिना जांचे अपनाए रहते हैं। आचार्य प्रशांत ने उदाहरणों के साथ यह दिखाया है कि कैसे डर, असुरक्षा और अज्ञान के कारण अंधविश्वास हमारे जीवन में जगह बना लेता है। पढ़ते समय कई बार ऐसा लगा कि मैं अपनी ही आदतों और सोच को...

Chapter 7 is the best one for me. Because it helped me to see that people want to superstition and to fill this vacuum of demand people come in as service provider. If a person do not want to give that service people will force him to do so. I learned from this that understanding my life is important, because I am the one asking for trash from the world and world has no particular intention to do ...
मेरे घर में दो लोग ऐसे हैँ जो शरीर से बीमार हैँ जिनकी दवाई बराबर चलने से उनके स्वस्थ्य में सुधार भी होता हैँ और एक तीसरी मेरी माता जी जो ऐसी अंधविश्वास से ग्रस्त हैँ उनकी बीमारी किसी भी दवाई से thik नहीं होती बल्कि मैं भी पिछले 25 सालो से बीमार ही था मानो, गुरुबार को बाल नहीं कटवाते, माथे पर तिलक लगा कर घर से निकलो, बिल्ली क रास्ता कट जाना, बाल में केवल शनिवार को ही तेल लगाना, साबुन दिन देख कर लगा...

मैं जन्म से ही ढरौ, अंधविश्वासों के बीच पला बढ़ा हूं। जो मैंने देखा उसी को सच मानकर बिना सवाल किए जी रहा था। जब इस किताब से मेरा मुलाकात हुआ तब पता चला कि मैंने अब तक जो कुछ मानते हुए जी रहा था। वह सब झूठ था। पूरानी परंपराओं, मान्यताओं का आडंबर मात्र है। इस किताब को पढ़कर बहुत कुछ समझ में आया।

जहां शिक्षा को अधिक महत्व नहीं दिया जाएगा वहां अंधविश्वास फैलेगा और अंधविश्वास फैलाने वाले लोग भोले भाले लोगों को मूर्ख बनाकर इस धंधे से अपनी रोटियां सेकेंगे। बहुत अच्छी बुक है , सभी को पढ़नी चाहिए। धन्यवाद आचार्य जी 🤗🤗🤗

चाँद पर घर बुक हो रहे हैं, लेकिन नीचे अब भी लोग नींबू-मिर्च लटका के निकलते हैं! ISRO सैटेलाइट भेज रहा है, और शर्मा जी आज भी कुंडली देखकर शादी तय करवा रहे हैं। ऐसे में काम आती है आचार्य जी की किताब "अंधविश्वास"—जो टोटकों की चेन तोड़ती है और दिमाग में तर्क ऑन कर देती है। पढ़ो, समझो, और फिर देखना... ना ग्रह-नक्षत्र डराएंगे, ना पंडित जी धमकाएंगे!

आदत मत डालिए जो नहीं पता उसको भी मान लेने की, की पता है ।सारा खेल उपनिषदों मे इसी का है ।जो नहीं जानते उसे जानने की कोशिश करो और जो जानते ही हो उसे पर सवाल खड़ा करो। हमें हर तरह की अंधविश्वास भरे होते है चाहे वह कुछ मानने की हो या फिर कोई चीज जो हम शुरू से करते जा रहे हैं बस करते जा रहे हैं क्यों कर रहे हैं किस लिए कर रहे हैं इस पर हमारा कोई ध्यान नहीं होता है, हम किसी चीज को शत- प्रतिशत इनकार न...