
अंधविश्वास पढ़कर मुझे यह समझ आया कि हम कितनी आसानी से बिना सोचे-समझे कई मान्यताओं को सच मान लेते हैं। यह किताब बहुत सीधे और तार्किक तरीके से उन विश्वासों पर सवाल उठाती है, जिन्हें हम अक्सर बिना जांचे अपनाए रहते हैं। आचार्य प्रशांत ने उदाहरणों के साथ यह दिखाया है कि कैसे डर, असुरक्षा और अज्ञान के कारण अंधविश्वास हमारे जीवन में जगह बना लेता है। पढ़ते समय कई बार ऐसा लगा कि मैं अपनी ही आदतों और सोच को...