
जिंदगी में ऐसे पल जरूर आते हैं जब हमें लगता है कि अकेले हैं,इस अकेले पन को भरने के लिए कोई चाहिए। कभी किसी व्यक्ति को लाते हैं जिंदगी में तो कभी कोई सामान, कभी घूमना फिरना,उपभोग ,हर चीज़ करते हैं हम। अगर वो इन सबसे ही चला जाए तो बार बार इसकी जरूरत ही क्यों पड़ती है। इस बुक को पढ़ते हुए समझ आया कि वास्तव में अकेलापन क्या है,सच में कोई समस्या है या हमारे ही बनाए नियम और परंपरा इसकी वजह हैं। हर युवा...

अकेलापन और निर्भरता पढ़ते समय मुझे एहसास हुआ कि जिसे हम अकेलापन समझते हैं, वह वास्तव में हमारी अपनी अंदरूनी स्थिति का परिणाम है। यह किताब बहुत सरल भाषा में बताती है कि हम क्यों दूसरों पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाते हैं और यही निर्भरता हमें भीतर से कमजोर बनाती है। आचार्य प्रशांत ने इस विषय को बहुत गहराई से समझाया है। पढ़ते-पढ़ते कई बार ऐसा लगा जैसे मेरी अपनी ही समस्याओं और भावनाओं को शब्द दिए ज...

यह पुस्तक सिखाती है कि कैसे हम जीवन में बिना उद्देश्य के जीवन व्यतीत करते है, समय को किसी निरर्थक चीज़ों में व्यय करते है जिससे हमारे अंदर अकेलेपन का भाव उत्पन्न होता है। प्रकृति (शरीर ) के मंसूबों को नहीं भांपते और प्रकृति में ही लिप्त हो जाते है जिससे मन में कुंठा, क्रोध, ईर्ष्या और विषाद जन्म लेती है, भीतर कुछ है जो चीख - चीखकर मुक्ति के लिए तड़प रही है पर हम अज्ञानवश उस अरिक्तता को पूर्ण करने ...

गलत चीजों में समय देने से बेहतर है थोड़ी देर रुक जाना। उसी तरह अकेलापन को दूर करने के लिए सस्ते उपाय और हल्के लोगों की संगत नहीं करना उचित नहीं है। इस पुस्तक को मैं जब दूसरे ईयर में था कॉलेज में तब पढ़ना चालू किया था और उसे समय मुझे लगता है यह पुस्तक बहुत उपयोगी साबित हुई थी क्योंकि उस समय भटगांव के समय और अवसर भी बहुत होते हैं किताब को पढ़ने के बाद मैं फुटबॉल खेलना चालू किया, स्विमिंग सीखने जाने...

यह पुस्तक मैने तब पढ़ी जब मैं अकेला रहता था और अकेलेपन से परेशान था। अकेलापन खाता था मेरे को। लेकिन यह पुस्तक पढ़ने के बाद मुझे समझ आया ऐसा क्यों होता है। मुझे समझ आया कि अकेले रहना कोई बूरी बात नहीं बल्कि एक संभावना है अपनी कमियों को देखने की। जब हम अकेले होते हैं तो हम अपनी कमियों को अच्छे से देख पाते हैं और जब हम उन्हें जानेंगे तभी उन कमियों को दूर कर सकते हैं। 2 वर्ष हो गए इस पुस्तक को पढ़े ...

Is book ko padhne ke bad yah pata chalega ki aap kaun ho aur aapki dependency kin chijon pay hai aur bahut sare log apni se pareshan rahte Hain ki unko ek akelapan Shubham Si hoti hai usse Bahar kaise nikala jaaye Aaj Tak is solution Ko Koi bhi kahin per bhi nahin deta hai