
अकेलापन और निर्भरता पढ़ते समय मुझे एहसास हुआ कि जिसे हम अकेलापन समझते हैं, वह वास्तव में हमारी अपनी अंदरूनी स्थिति का परिणाम है। यह किताब बहुत सरल भाषा में बताती है कि हम क्यों दूसरों पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो जाते हैं और यही निर्भरता हमें भीतर से कमजोर बनाती है। आचार्य प्रशांत ने इस विषय को बहुत गहराई से समझाया है। पढ़ते-पढ़ते कई बार ऐसा लगा जैसे मेरी अपनी ही समस्याओं और भावनाओं को शब्द दिए ज...