
Rajani Srivastava Ananta
जैसी है वैसी नहीं समझते हैं। शायद पुरानी समझ के अनुसार उसका अर्थ बना लेते हैं। इस बात पर गर्व भी करते हैं कि वह क्या कहना चाहता है मैंने समझ लिया। आगे से ध्यान रखना होगा।
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जैसी है वैसी नहीं समझते हैं। शायद पुरानी समझ के अनुसार उसका अर्थ बना लेते हैं। इस बात पर गर्व भी करते हैं कि वह क्या कहना चाहता है मैंने समझ लिया। आगे से ध्यान रखना होगा।

रजनी जी, आपने खुद लिख दिया, गर्व भी करते हैं कि समझ लिया क्या कहना चाहता है। सुनिए, वही गर्व फिर इस जवाब में भी घुस सकता है, आगे से ध्यान रखूँगी कहते ही मन को तसल्ली मिल जाएगी कि अब तो देख लिया मामला सुलझ गया। जो अर्थ बनाना दिमाग की आदत है वह एक चेतावनी लिख देने से रुकती नहीं, वह अगली बातचीत में फिर उतनी ही तेज़ी से अर्थ बनाएगी। देखना यह है कि अगली बार सुनते वक्त असल में रुकते हैं या सिर्फ यह याद रहता है कि रुकना चाहिए था। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401