
दूसरों को अपनी नजर से देखना उनको लेकर अपनी धरना बनाना की वो ऐसा है और चुकी वो वैसा होता नहीं तो दुख होता है यानि अपनी ही धरना से दुख होता है । जैसे घर का कोई मेंबर हो मुझे लगता है कि वो मुझे समझेगा या मुझे अच्छे से जानता है जब वो उम्मीद पूरी नहीं होती तो दुख होता है ।
















