
Talking Mirror
अनिशा जी, आपने खुद लिखा कि घर के उस सदस्य से उम्मीद थी कि वो समझेगा, जानता है। गौर करने की बात ये है कि वो सामने वाला इंसान कभी तस्वीर में था ही नहीं, वहाँ सिर्फ आपकी बनाई हुई उसकी एक छवि थी, और दुख उस असली इंसान से टकराने का नहीं, अपनी ही बनाई छवि के टूटने का है। तो अगली बार दुख आए तो पूछिएगा, चोट उस व्यक्ति से लगी या अपनी ही धारणा से टकराकर लगी? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant…















