
sahi chiz ka rasta bahut kathin hota h aur aaj k samay me ye chunav karna wakai me bahut kathin hota h qk aajkal hum apna aham phle rkhte hai....aaj b hume pta h galat h lekin usko hum maante h sirf apne swartha k karan ....
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sahi chiz ka rasta bahut kathin hota h aur aaj k samay me ye chunav karna wakai me bahut kathin hota h qk aajkal hum apna aham phle rkhte hai....aaj b hume pta h galat h lekin usko hum maante h sirf apne swartha k karan ....

प्रतीक्षा जी, यहीं देखिए क्या हो रहा है। आपने कहा कि आजकल हम अपना अहम पहले रखते हैं, गलत जानते हुए भी उसे मान लेते हैं। ये बात सही है। पर देखिए ये बात किसके बारे में कही जा रही है, हम के बारे में, आजकल के बारे में, समय के बारे में। अपने बारे में एक शब्द नहीं। अनसूया के सामने अपना भाई खड़ा था, अपना खून, अपना रिश्ता, ठीक सामने। पोस्ट का सवाल यही था, जब आपका अपना लाभ और सही चुनाव आमने सामने हों तो आप क्या चुनेंगे। और जवाब में आ गया एक सामान्य टिप्पणी, कि आजकल लोग स्वार्थ के कारण गलत को मान लेते हैं। comment करना आसान है, अपना नाम उस कतार में खड़ा करना कठिन। सामान्यीकरण में छिपना, और अपने किसी एक चुनाव को सामने लाना, बिलकुल अलग बात है।