विकास जी - रामगढ़, झारखंड से हैं। डेढ़ साल से गीता सत्रों से जुड़े हैं। 🔷 पहले सब कुछ ऊपरी तौर से सुनते थे। आचार्य जी से मिलने के बाद समझ आया - अपना केंद्र क्या है और उसे कैसे सुधारना है। 🔷 धर्म को अब एक फिलॉसफी के तौर पर देखते हैं। गीता उनके लिए जीवन दर्शन बन गई है। "बाहरी जानकारी से पहले खुद को जानना ज़रूरी है - यही आत्म मंथन की शुरुआत है।" गीता सत्रों से जुड़िए - अपना केंद्र पहचानिए। 🪔

























