हमारा जब केंद्र सही होता है तो बदलाव प्रारंभ होता है , आचार्य जी से मिलने से पहले बस…
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Kumari Ranjana
हमारा जब केंद्र सही होता है तो बदलाव प्रारंभ होता है , आचार्य जी से मिलने से पहले बस बाहरी बाहरी चीजें बदलकर बदलाव की आकांक्षा करती थी और अंततः दु:ख ही मिलता था, केंद्र की तरफ सबसे पहले देखना होता है, ये समझ नहीं थी!