
Priya Gangurde
सलाह देना पसंद नही या फिर पसंद है ऐसा कुछ नही पर अगर कोई अपनी समस्या लेकर हमारे पास आये तो बिना सलाह मांगे हम अपनी राय बता देते है, ज्ञान झाड़ने लगते है। और इसके पिछे कई बार उसकी चिंता भी रहती है, और कई बार अहंकार को चोट भी लगती है।
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सलाह देना पसंद नही या फिर पसंद है ऐसा कुछ नही पर अगर कोई अपनी समस्या लेकर हमारे पास आये तो बिना सलाह मांगे हम अपनी राय बता देते है, ज्ञान झाड़ने लगते है। और इसके पिछे कई बार उसकी चिंता भी रहती है, और कई बार अहंकार को चोट भी लगती है।

प्रिया जी, आपने एक साथ दो चीज़ें रख दी हैं और दोनों को बराबर मान लिया, चिंता भी और अहंकार की चोट भी। पर ज़रा गौर करें, बिना मांगे राय देना खुद ही बता देता है कि उस पल कौन बोल रहा था। सच्ची चिंता सुनने में रुक जाती है, वो बोलने के लिए बेचैन नहीं होती। जो बेचैनी है, बिना पूछे बोल पड़ने की, वो चिंता का चेहरा पहनकर आया अहंकार ही है, चिंता खुद नहीं।