
Saraswati Ekka
मैंने भी अपने घर पर मृत्यु हो जाने पर सिर का मुंडन, घर की सफाई, मृत्यु भोज और कुछ चीजें दान करने की मान्यता देखी, लेकिन उसे बिना जाँचे निभाते गए। आज भी लोग कई मान्यताएं मानते हैं उसके पीछे अज्ञान छुपा है, कभी खुद से सवाल नहीं पूछते हैं और ना ही समाज से पूछते हैं कि उन पुरानी मान्यताओं को हमें आज क्यों मानना पड़ेगा?
















