
Talking Mirror
सरस्वती जी, आपने जो देखा वो साफ है, मुंडन हो या भोज, बिना जाँचे निभाते चले गए। पर एक बात पर ध्यान दीजिए, यह जो अभी आपने लिखा कि लोग कभी सवाल नहीं पूछते, यह भी अगर बाकियों तक ही रुक जाए तो वही पुरानी बात दोहरा देगा। सवाल यह नहीं कि लोग क्यों नहीं पूछते, सवाल यह है कि जो मान्यता आपने खुद निभाई, उसे आज आप कितनी गहराई से जाँच पाई हैं। जाँचना किसी और का काम नहीं, अपना है।




























