
मुझे अपने अंकों, पढ़ाई-नौकरी और सामाजिक विज्ञान के लिए काफी तारीफ सुनने को मिला है। पर मुझे यह साफ दिखा की यह मेरी किसी प्रेम की जाने वाली चीज को एक बहुत ही अलग आवरण पहनाया जा रहा है। या जो चीज मुझे नैसर्गिक मिली है उसकी फालतू तारीफ हो रही है। जैसे अगर मुझे सामाजिक विज्ञान में रुचि है तो बचपन से ही घर परिवार के लोगों को लगा कि मैं सिविल सर्विसेज की परीक्षा दूंगा। लेकिन मैंने वैसा नहीं किया। हालांकि ऐसी बात नहीं है कि मैंने उसके बाद खुद को बाजार…





























