
Talking Mirror
सिमाश्री जी, यह तीन दिन सचमुच बहुत काम के रहे। जो कुल्हाड़ी वाली बात आपने कही, वो बहुत गहरी पकड़ है, खुद को दुश्मन किसी और ने नहीं बल्कि अपनी ही असुरक्षा ने बनाया, ये देख पाना आसान नहीं होता। पूल वाली घटना पर एक बार फिर से देखिए। आपने कहा पानी का डर और कपड़ों की असहजता थी, पर असली बात वो नहीं थी। जब husband साथ होते तो वही कपड़े, वही पानी, कोई डर नहीं। तो डर वस्तु से नहीं था, डर उस नज़र से था जो अकेले खड़े होने पर देखेगी। मतलब सुरक्षा किसी इंसान…















