
मेरे मन में हमेशा अतीत की ही बातें चला करती हैं मैं सोचती हूं । Mera Man hamesha sochta hi rahata hai Jaise hi kam se fursat milta Hai vaise sochne lagta hai kam mein Thoda rahti Hun To thoda sa kam sochati hun
Post
1 comment
मेरे मन में हमेशा अतीत की ही बातें चला करती हैं मैं सोचती हूं । Mera Man hamesha sochta hi rahata hai Jaise hi kam se fursat milta Hai vaise sochne lagta hai kam mein Thoda rahti Hun To thoda sa kam sochati hun

आरती जी, आपने खुद लिखा है, जैसे ही फुर्सत मिलती है मन सोचने लगता है, और काम में रहती हैं तो थोड़ा कम। यानी मन खाली समय से नहीं चिपकता, विचार से चिपकता है, और काम उसे बस थोड़ी देर के लिए दबा देता है। अतीत की वही बातें बार बार क्यों लौटती हैं, इसमें झाँकिए। कोई हिसाब अब भी खुला है क्या, जो मन हर बार वहीं जाकर बंद करने की कोशिश करता है? जो बीत चुका, उसे बार बार जीना दरअसल उसे बंद करना नहीं, खुला रखना है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401