
मैंने अपनों को और उनकी सच्चाई और भोलेपन को समाज के झूठ से तौला है।समाज या ऐसे लोग जो खुद सही नहीं है वो हमे जज करेंगे औरों के जैसा व्यवहार नहीं करेंगे,इसमें डर हावी हो गया और वहां सच, वास्तविकता को ठुकराने की कोशिश की।।😞😞 आज जब वे नहीं रहें तो उनके लिए महत्व और बढ़ गई ,इससे अंदर हमेशा अपने प्रति एक दोगलेपन महसूस होता है।समाज ,समाज जो इंसान को खाता है जीते जी उन्हें जीने नहीं देता न ही उनकी सच्चाई को महत्व देता है।हमारे अंदर कॉन्फिडेंस नहीं आता ,…
















