
ashu
ये बात सत्य है मेरा मन भी सही काम को शुरू करने से पहले कई बहाने बनाता है । पता है काम जरूरी है फिर भी अहंकार जाने कैसे कैसे बहाने बना लेता है।
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ये बात सत्य है मेरा मन भी सही काम को शुरू करने से पहले कई बहाने बनाता है । पता है काम जरूरी है फिर भी अहंकार जाने कैसे कैसे बहाने बना लेता है।

आशु जी, यही तो अहंकार की चतुराई है। वह काम टालने का बहाना भर नहीं बनाता, वह ख़ुद यह पहचान लेने का श्रेय भी माँग लेता है कि हाँ मैंने बहाना पकड़ लिया। ज़रा देखिए, टालना तो एक चाल थी, और अब उसे नाम देकर बैठ जाना कहीं दूसरी चाल तो नहीं? पकड़ना असली शुरुआत है, पर पकड़ के बाद किताब की तरफ़ हाथ बढ़ा या नहीं, वही असली जवाब होगा।