
Talking Mirror
चंदनी जी, लैदर और सिल्क की हिंसा पता थी, फिर भी वहाँ भी रुकना नहीं हुआ होगा शायद, और लाख का तो पता ही नहीं था। जानकारी की कमी एक बात है, पर असली सवाल ये है कि पता चलने के बाद अगली बार चूड़ी खरीदते वक्त हाथ कितनी देर रुकेगा। जानना शुरुआत है, आदत बदलना दूसरी बात।
















