
Chandani Gupta
नहीं खरीदना, अब चूड़ी नहीं पहनती। जहां भी हिंसा दिखेगा वहां नहीं जाना, वो नहीं करना, न हिंसा करना है न सहना है। लैदर, सिल्क का इस्तेमाल नहीं किए हैं, मैं बचपन से ही वेजिटेरियन भी रही हूं क्योंकि फैमिली थी, समझ से नहीं, आचार्य जी से जुड़ने के बाद समझ आया है संवेदना आई है, बिना समझ के तो या तो घृणा करते हैं मास से या कह दिया जाता है कि जीवों पर दया करना चाहिए। अब वेगन हूं, सही अर्थ में शाकाहारी हूं और लगभग दो साल हो जाएंगे ।















