
प्रणाम आचार्य जी 🙏❤️ आचार्य जी, पाँच साल बाद मैंने स्कूटी चलाई। पाँच साल पहले हुए एक्सीडेंट के बाद मेरे मन में इतना डर बैठ गया था कि दोबारा स्कूटी चलाने की हिम्मत नहीं हुई। बार-बार लगता था, फिर गिर गई तो? चोट लग गई तो? इस डर ने मेरे पाँच साल मुझसे छीन लिए। लेकिन आपको सुनने के बाद कल मैंने फिर स्कूटी चलाई। डर के साथ आनंद भी था। लगा, मैं स्कूटी नहीं, अपने भीतर बैठे डर को चुनौती दे रही हूँ। तब समझ आया कि हम वास्तविक परिस्थितियों से कम और मन की ब…














































