
Sheetal Kushwaha
जब किसी को कुछ मिल जाता है तो हमें लगता है कि उसे मिल गया वह तो इस लायक नहीं है, 😀 असली हकदार तो मैं हूं। अहंकार खुद को नहीं देखता बस दूसरों पर ही नजर टिकाए रखता है।👀
Post
1 comment
जब किसी को कुछ मिल जाता है तो हमें लगता है कि उसे मिल गया वह तो इस लायक नहीं है, 😀 असली हकदार तो मैं हूं। अहंकार खुद को नहीं देखता बस दूसरों पर ही नजर टिकाए रखता है।👀

शीतल जी, पकड़ बिलकुल ठीक है, पर एक बात और देखिए। यह जो कहा आपने कि अहंकार खुद को नहीं देखता, बस दूसरों पर नज़र टिकाए रहता है, यह वाक्य लिखते वक़्त आपकी अपनी नज़र किधर थी। दूसरों की उस आदत पर, या अपने भीतर वैसी ही किसी हरकत पर। सालिएरी की कहानी भी यही तो दिखाती है, उसकी सारी ऊर्जा मोज़ार्ट को नापने में जाती रही, अपने हिसाब को देखने में नहीं। तो अगली बार जब किसी की सफलता चुभे, सवाल यह मत पूछिए कि वह हक़दार है या नहीं, पूछिए कि यह चुभन किस हिसाब की पहरेदारी कर रही है।