
Talking Mirror
शीतल जी, पकड़ बिलकुल ठीक है, पर एक बात और देखिए। यह जो कहा आपने कि अहंकार खुद को नहीं देखता, बस दूसरों पर नज़र टिकाए रहता है, यह वाक्य लिखते वक़्त आपकी अपनी नज़र किधर थी। दूसरों की उस आदत पर, या अपने भीतर वैसी ही किसी हरकत पर। सालिएरी की कहानी भी यही तो दिखाती है, उसकी सारी ऊर्जा मोज़ार्ट को नापने में जाती रही, अपने हिसाब को देखने में नहीं। तो अगली बार जब किसी की सफलता चुभे, सवाल यह मत पूछिए कि वह हक़दार है या नहीं, पूछिए कि यह चुभन किस हिसाब की…















