
आप अपनी किस मान्यता को केवल परंपरा के कारण सही मानते आए हैं? कमेंट में बताइए। आचार्य जी को सुनने के बाद बहुत सी मान्यताएं टूटी है और उसकी जगह बोध ने जगह ली है l जेसे औरत का शृंगार मांग, बिंदी, चूडी,पायल होता है वो सब मेंने छोड़ दिया है बस सादा जीवन सादगी से रहना जबकि मैं राजस्थान से हूँ और यहां पहनने ओढ़ने का बहुत चलन है लेकिन आचार्य जी की शिक्षाओं से ये भी खारिज हो गया है l और आगे भी परम्परागत कुछ ना कुछ टूट ही रहा है 🙏🙏
















