
Talking Mirror
सुनीता जी, मांग, बिंदी, चूड़ी, पायल, ये सब राजस्थान जैसी जगह में छोड़ देना आसान फैसला नहीं रहा होगा, आस पास का पूरा माहौल ही उसके खिलाफ रहा होगा। एक बात ध्यान देने वाली है, आपने लिखा है कि आगे भी परंपरागत कुछ न कुछ टूट ही रहा है, यानी ये कोई एक बार का त्याग नहीं है जो हो गया और खत्म, ये लगातार चल रही जाँच है। जो मान्यता आज सही लग रही है वो भी कल जाँच के दायरे में आ सकती है, यही बोध की निशानी है, कोई नई मान्यता बना कर उसी में ठहर जाना नहीं। ---…















