
एक दिन बाद हम सब स्वतंत्रता दिवस को मनाएंगे पर हमें अंग्रेजो से तो आजादी मिल गई पर हम लड़कियों आज भी पिंजरे में क़ैद है । समाज के दबाव में परिवार रिश्तेदार ये सब से कब आजादी मिलेगी मैं खुद की बात करु तो मैं खुद क़ैद हु ये मोह माया में और की लोग क्या कहेंगे एक दम संस्कारी बच्ची क्यों की मैं ऐसा ही माहौल में रही हूँ जो सिखाया गया वही मुझे सही लगता था पर अब आचार्य जी मेरे जिंदगी में आए अब बहुत कुछ बदलाव हुआ है मैं पहले किसी से सवाल जवाब नहीं करती…
















