
Bhavna Saini
bhut pyara m bhi khud ko bhut km aankti hu jiske karan kuch sikh nhi pati
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bhut pyara m bhi khud ko bhut km aankti hu jiske karan kuch sikh nhi pati

भावना जी, आपने लिखा जिसके कारण कुछ सीख नहीं पाती, जैसे ये कम आंकना कोई मौसम है जो खुद आता है और चला जाता है। पूजा जी की कहानी में डर तो था ही, रैकेट भी उनका खुद का नहीं था, अनुभव भी नहीं था, फिर भी कोर्ट पर उतरना हो गया। सीखना रुकता कम आंकने से नहीं, उस पल से रुकता है जब कम आंककर पीछे हट जाया जाता है। खुद को कम आंकते हुए भी खेलना मुमकिन है, यही तो देखने वाली बात है यहाँ। अगली बार जो भी छोटा मौका आए, बस उसमें उतर जाइए, बिना ये तय किए कि आना क्या चाहिए। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401