
नमस्ते आचार्य जी, कल ये दोनों पेंटिंग्स एक साथ बनी, और मजेदार बात क्या हुई वो आपको पता है। अभी तक की समझ मैं हूं यह ही सबसे पहली और गहरी मान्यता है। मेरा होना बस जानते रहना, कि जो जानने कि कोशिश कर रहा है, वो भी है नहीं, प्रतीत हो रहा है। ओरिजिन कहां है? न शुरू हो रहा, न अंत हो रहा, ना अभी है, बस जो भी प्रतीत हो रहा " वो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना है" 🤣🤣🤣 देह धरे का दंड है। जितनी मैं कम, उतने आप ज्यादा, यह जाना जा रहा है।😄🙏
















