
भालू के साथ जो कर रहे हैं, क्या वही प्रवृत्ति हम अपने आसपास की दुनिया के साथ भी अलग-अलग रूपों में नहीं दोहरा रहे हैं? मैं बीते दिनों एक गुरुद्वारे में में गई थी जो एकजंगल के अंदर ही है और उस जंगल के अंदर एक तथाकथित गुरु महाराज रहता है जो यह कहता है जानवरों पर दया करो और खुद जानवरों को कैद कर के रखा है हर एक को पिंजरे में वहां मैंने देखा चार ऊंट थे जिनके घुटने पूरी तरह से छिले हुए थे, और ये कहते हैं जानवरों पर दया करो चिड़ियों का एक पिंजरा थ…
















