
Rajan Kumar
मनुष्य प्रत्येक चीज़ में स्वार्थ देखता है। यदि वह उसके काम का नहीं है, तो उससे मतलब भी नहीं रखता। और यदि उसके काम का हो जाता है, तो चाहे वह उसे सम्मान दे या न दे, लात भी लगाए, फिर भी उससे दोस्ती करता है। और इस लालच में वह अपनी आँखें बंद कर लेता है। यदि गलत भी हो रहा है, तो वह चुपचाप देखता है। उसे तो बस अपने फायदे दिखाई देते हैं। आसपास उसके व्यवहार में भी ये चीज़ें झलकती हैं। और इससे बढ़कर, वह तो अपने साथ भी स्वार्थ का ही रिश्ता रखता है। शरीर को…
















