
Geeta
ल़डकियों को अक्सर रिश्तेदार जाते time पैसे देकर जाते हैं, तो वह पैसा अलग रखती थी as a saving 😂 या अपने खर्च के लिए l
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ल़डकियों को अक्सर रिश्तेदार जाते time पैसे देकर जाते हैं, तो वह पैसा अलग रखती थी as a saving 😂 या अपने खर्च के लिए l

गीता जी, मज़ेदार बात ये है कि रिश्तेदार का दिया वो पैसा जितनी आसानी से अलग खाते में गया, उतनी आसानी से पापा की दी हुई पॉकेट मनी शायद न जाती। पैसा वही कागज़ था, बस साथ में रिश्ते का एक टैग चिपक गया, और वो टैग तय करने लगा कि उसकी हिफाज़त कितनी ज़रूरी है। सोचिए, वो सेविंग असल में पैसे की सुरक्षा थी या उस रिश्ते और उस पल की याद को सहेजने का एक तरीका?