
पिछले हफ्तों में जो चीजें मैने की जिसने मुझे अच्छा महसूस कराया वो थी मंदिर जाना इधर उधर की बातों में शामिल होना और खुद को इधर उधर की बातों मैं शामिल होकर खुद को महान समझना है, और दूसरी तरफ था सत्र सुनना जब भी सत्र को ईमानदारी और एकाग्रता के साथ सुनती हु तो बहुत कुछ भीतर टूट रहा होता है और पिछले हफ्तों मैं सत्रों को एकाग्रता के साथ सुनने से मेरी मान्यताओं को टूटते देखा है
















