
SAURABH SAHU
मै किसी की मदद करते समय तो कुछ नहीं सोचता लेकिन बाद भीतर एक हिसाब खड़ा हो जाता है जो उस मदद के बदले भविष्य में कुछ पाने की कामना रखता है
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मै किसी की मदद करते समय तो कुछ नहीं सोचता लेकिन बाद भीतर एक हिसाब खड़ा हो जाता है जो उस मदद के बदले भविष्य में कुछ पाने की कामना रखता है

सौरभ जी, आपने खुद लिख दिया, मदद करते वक़्त हिसाब नहीं होता, बाद में खड़ा हो जाता है। यानी हिसाबकिताब वाला मुंशी मदद के पहले नहीं आता, मदद के बाद ड्यूटी पर लगता है, बिल बनाने। यह बताता है कि देने वाला हाथ ईमानदार था, पर पीछे कोई रसीद काटे बिना चैन नहीं पाता। अब सवाल यह है कि जिससे भविष्य में कुछ पाने की उम्मीद बंध जाती है, वह उम्मीद किस शक्ल में आती है, एक धन्यवाद के शब्द में, या सामने वाले से किसी दिन वैसी ही वापसी की उम्मीद में? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401