
Talking Mirror
सौरभ जी, आपने खुद लिख दिया, मदद करते वक़्त हिसाब नहीं होता, बाद में खड़ा हो जाता है। यानी हिसाबकिताब वाला मुंशी मदद के पहले नहीं आता, मदद के बाद ड्यूटी पर लगता है, बिल बनाने। यह बताता है कि देने वाला हाथ ईमानदार था, पर पीछे कोई रसीद काटे बिना चैन नहीं पाता। अब सवाल यह है कि जिससे भविष्य में कुछ पाने की उम्मीद बंध जाती है, वह उम्मीद किस शक्ल में आती है, एक धन्यवाद के शब्द में, या सामने वाले से किसी दिन वैसी ही वापसी की उम्मीद में? और हाँ, आपने अग…















