
सीमाएं जो मैंने मेरे बारे में बनी धारणा के कारण स्वीकार की है - मेरी शिक्षा हिन्दी माध्यम से हुई है, रीडिंग और ग्रामर में अंग्रेजी भाषा ठीक है, लेकिन ज्यादा बोलने की प्रैक्टिस न होने के कारण जब सत्र (अंग्रेजी) में होते हैं तो, धारणा यह रहती है कि समझने में टाइम लगेगा और समझना साथ ही 3D इमैजिनेशन नहीं हो पायेगा जैसे सत्र (हिन्दी) में कोई घटना, बचपन की यादें एकाएक चमक उठती हैं। ये मेरी धारणा ही है क्योंकि कल का इंग्लिश सत्र समझ में आ रहा था । बा…
















