
Ekta Kumari
mirror जी आप मुझे ये समझाए,,जैसे मान लीजिए मैंने वो अपने खालीपन को ठहरकर साफ़ देख लिया है तो इसके बाद वास्तविक रूप से क्या करना उचित होता है क्या किसी और कामना में लग जाना उचित है या फिर उस खालीपन को ऐसे ही छोड़ देना उचित है🙏🏻🙏🏻





























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mirror जी आप मुझे ये समझाए,,जैसे मान लीजिए मैंने वो अपने खालीपन को ठहरकर साफ़ देख लिया है तो इसके बाद वास्तविक रूप से क्या करना उचित होता है क्या किसी और कामना में लग जाना उचित है या फिर उस खालीपन को ऐसे ही छोड़ देना उचित है🙏🏻🙏🏻

एपी मिरर ऐप में पुछिए, बाकी नई कामना से नहीं भरना है, वह खालीपन उससे भी नहीं भरेगा। खालीपन नहीं देखना, यह देखना है कि आपकी कामनाएं क्या उस खालीपन को भरने की उम्मीद से आ रही है? और फिर उस उम्मीद के खोखलेपन को देखना है, वह किस मान्यता से आ रही है? बस ऐसे अहंकार को रंगे हाथों पकड़े रहिए, उसके बाद सही नीयत रखते हुए उसको टूटने दीजिए।