जहाँ कई विकसित देशों में महिलाओं की खेल उपलब्धियाँ राष्ट्रीय सफलता का बड़ा आधार हैं, वहीं…
Post
2 comments
ARCHANA TAK
जहाँ कई विकसित देशों में महिलाओं की खेल उपलब्धियाँ राष्ट्रीय सफलता का बड़ा आधार हैं, वहीं भारत में अक्सर लड़कियों को खेलों से हतोत्साहित किया जाता है और उनके पहनावे या शरीर तक चर्चा सीमित रह जाती है।
इसके पीछे कौन-सी गहरी मान्यताएँ काम करती हैं? हाल के समय से कुछ उदाहरण देकर बताइये की कैसे लोकधर्म इसमें एक बड़ी भूमिका निभाता है।
1. लड़की को बाहर धूप मिट्टी में खेलने भेजते हैं तो, वह काली, हो जाती है, बाल व खाल खराब हो जाती है, चोट लगती है तो कौ…
मैं पिछले 18 महीनों से जिम जा रही हूँ और हाँ, पिछले 4 सालों से आचार्य प्रशांत के वीडियो भी देख रही हूँ। मैंने देखा है कि वहाँ कई महिलाएँ वेट ट्रेनिंग नहीं करना चाहतीं; वे बस थोड़ी-बहुत एरोबिक्स और डांस करती हैं। जब हममें से 2-3 लड़कियाँ एरोबिक्स के बाद वेट ट्रेनिंग और जिमिंग करती हैं, तो कई लोगों को यह पसंद नहीं आता। उन्हें लगता है कि लड़कियों को वेट लिफ्टिंग की क्या ज़रूरत है? इससे तो शरीर पुरुषों की तरह भारी-भरकम और मस्कुलर हो जाएगा। धीरे-धीरे उनमें से कुछ को मज़बूत मांसपेशियों के महत्व के बारे में पता चला और अब वे भी वेट ट्रेनिंग करने लगी हैं। तो हाँ, कई भारतीय महिलाएँ ऐसी चीज़ों पर आपत्ति जताती हैं और इसके पीछे यह सोच होती है कि लड़कियाँ नाज़ुक ही अच्छी लगती हैं। अच्छी बात यह है कि पुरानी पीढ़ी के मुक़ाबले आज की युवा लड़कियाँ इन रूढ़ियों को तोड़ रही हैं और जिम में ज़बरदस्त वेट ट्रेनिंग कर रही हैं। हमें यह समझना होगा कि नाज़ुक बने रहना या दिखना कभी भी फायदे का सौदा नहीं था।
Mohit Mathur
बहुत सुंदर .
लोकधर्म है ये एशे लोग मिलते रहेंगे और बोलते रहेंगे आप इनको इग्नोर करोऔर बढ़ते रहो 💪