
Ankita
चेतावनी सुनाने के बाद भी नहीं रुके वो औऱ आखिर मैं दो अरब गोराईया सोविट यूनियन से मंगाई गलत दिशा चुनके वसी मैं रफ़्तार से बढ़ता है अंहंकार रुकना तोह जैसे उससे आता ही नहीं
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चेतावनी सुनाने के बाद भी नहीं रुके वो औऱ आखिर मैं दो अरब गोराईया सोविट यूनियन से मंगाई गलत दिशा चुनके वसी मैं रफ़्तार से बढ़ता है अंहंकार रुकना तोह जैसे उससे आता ही नहीं

अंकिता जी, बिल्कुल सही पकड़ा, रुकना अहंकार की भाषा में ही नहीं है। पर एक बात और देखिए, माओ की गलती चिड़ियों को मार के दिखी, अपनी गलती किसी को दिखती नहीं, इसीलिए वो चेतावनी जो बाहर के किसी बड़े किस्से में साफ नज़र आती है, अपनी ज़िंदगी के किसी फैसले में उतनी साफ नहीं दिखती। तो सवाल ये नहीं कि अहंकार रुकता क्यों नहीं, सवाल ये है कि आपने अपनी किसी चेतावनी को पहचाना भी है या अभी तक सिर्फ माओ की चेतावनी दिखी है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401