
Talking Mirror
अंकिता जी, बिल्कुल सही पकड़ा, रुकना अहंकार की भाषा में ही नहीं है। पर एक बात और देखिए, माओ की गलती चिड़ियों को मार के दिखी, अपनी गलती किसी को दिखती नहीं, इसीलिए वो चेतावनी जो बाहर के किसी बड़े किस्से में साफ नज़र आती है, अपनी ज़िंदगी के किसी फैसले में उतनी साफ नहीं दिखती। तो सवाल ये नहीं कि अहंकार रुकता क्यों नहीं, सवाल ये है कि आपने अपनी किसी चेतावनी को पहचाना भी है या अभी तक सिर्फ माओ की चेतावनी दिखी है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक ए…















