
अभी मैं अपने जीवन पे किसी और का ही नियंत्रण पाती हूं और मुझे ये बदलना है। हमेशा यही चलते रहता है कि बदलना है लेकिन कैसे? ये नहीं पता। रात को सोते वक्त भी और कभी नींद खुले तो भीतर घुसती हूं अपने पर फिर से भी सब कुछ आ जाता है blame करना कि मेरी जिंदगी दूसरों की वजह से सही नहीं चल रही अपने अंदर चाह कर भी देख नहीं पाती पता नहीं गलती क्या कर रही हूँ?
















