
अहंकार करेगा बोहत कुछ भौतिक और वैचारिक स्तर पर, लेकीन अगर शुरुवात से आख़िर तक हर पल उसे देखना 👀 सहजता से होने लगे तो! बोहत सहज हो जाता है अहंकार को समझना , हाँ लेकिन बिल्कुल ये होता है,बार बार होता है, स्वार्थ के चलते यह देखने की प्रक्रिया खंडित होती है, फिर अहंकार ही अहंकार, स्वतः को देखने लगता है । प्रेम जो हो गया है । देखो सब तो बोल दिया ,दोहा भी गा दिया ,अभी पोस्ट भी करूँगा लेकिन यह भी अहंकार से ही संचालित हो रहा है, अहंकार तो रहेगा बस देख…


















