
hmm मैं पढ़ लिख कर किचेन सम्हाल रही हूं जो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है और इसका दोष मैं अपने पैरेंट्स हसबैंड को देती रहती हूं और ज़बाब में यही मिलता है सब शादी से ग़लत हुआ तो शादी के पहले क्या उखाड़ लिया तुमने मैं बहुत हाथ पैर मार रही की कुछ कर लूँ पर लूप में फस गई हूं कोई समझने वाला नहीं है पर लाइफ़ में कुछ अच्छा नहीं लग रहा कैसे करूं पता नहीं बस ये पता है जैसा चल रहा वो ठीक नहीं।
















