
प्रणाम आचार्य जी 🙏🏻 आचार्य जी, आपको सुनने से पहले, मैं भी उस मानसिक गुलामी में जी रही थी जो समाज ने एक महिला के लिए तय कर रखा है। आचार्य जी, खुद से लड़ने की और पुरानी आदतों को बदलने की यह हिम्मत मुझे आपकी शिक्षाओं से मिली है। यह बदलाव केवल बाहरी नहीं है, यह आंतरिक स्वतंत्रता की शुरुआत है, जहाँ मैं समाज की नज़रों से नहीं, बल्कि बोध हो से जी रही हूँ। इस जागरूकता के लिए आचार्य जी और संस्था की गहराई से आभारी हूँ। आंतरिक स्वतंत्रता की ओर एक कदम,…



















