
Sanket Sudhakar Mahajan
❓ तो क्या सूखे के बाद राहत और व्यवस्था में सुधार ही पर्याप्त हैं? या हमें व्यक्ति-स्तर पर उस “और चाहिए” वाली गति को भी देखना होगा, जो हमारी सामूहिक जीवन-शैली को लगातार चलाती है? 👉🏽 मुझे, हमे उस और चाहिए वाली गती को भी देखना होगा |
















